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الضحى

हिन्दी Translation with Arabic Quran Text

हिन्दी العربية
1 कस़म है धूप चढ़ने के समय की! وَٱلضُّحَىٰ. ﴿1﴾
2 और क़सम है रात की, जब वह छा जाए। وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ. ﴿2﴾
3 (ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ। مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ. ﴿3﴾
4 और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है। وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ. ﴿4﴾
5 और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा। وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ. ﴿5﴾
6 क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी? أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ. ﴿6﴾
7 और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया। وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ. ﴿7﴾
8 और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया। وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ. ﴿8﴾
9 अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।[1]
[1] (1-9) इन आयतों में अल्लाह ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से फरमाया है कि तुम्हें यह चिंता कैसे हो गई है कि हम अप्रसन्न हो गए? हमने तो तुम्हारे जन्म के दिन से निरंतर तुमपर उपकार किए हैं। तुम अनाथ थे, तो तुम्हारे पालन और रक्षा की व्यवस्था की। राह से अंजान थे, तो राह दिखाई। निर्धन थे, तो धनी बना दिया। ये बातें बता रही हैं कि तुम आरंभ ही से हमारे प्रियवर हो और तुमपर हमारा उपकार निरंतर रहा है।
فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ. ﴿9﴾
10 और माँगने वाले को न झिड़कें। وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ. ﴿10﴾
11 और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।[2]
[2] (10-11) इन अंतिम आयतों में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को बताया गया है कि हमने तुमपर जो उपकार किए हैं, उनके बदले में तुम अल्लाह की उत्पत्ति के साथ दया और उपकार करो यही हमारे उपकारों की कृतज्ञता होगी।
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ. ﴿11﴾