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'അറ്റാക്ക് വന്നതാ സാറേ, ഭാര്യയുടെ മൊഴി', തൃശൂരിൽ 41 കാരനെ കൊന്നത് ഭാര്യയും കാമുകനും ചേർന്ന്, തോർത്തുകൊണ്ട് കഴുത്തിൽ വലിച്ച് മുറുക്കി — Asianet News Malayalam കുന്നത്തൂർ മിനി സിവിൽ സ്റ്റേഷൻ നിർമാണത്തിൽ വീഴ്ച; മൂന്ന് പിഡബ്ല്യുഡി എഞ്ചിനീയർമാർക്ക് സസ്പെൻഷൻ, കരാറുകാർ ഊരാളുങ്കൽ സൊസൈറ്റി — Asianet News Malayalam 'നാല് താരങ്ങൾ, നാല് ഇടങ്ങൾ; ഒരേസമയം 'ഉടുമ്പൻചോല വിഷൻ' ട്രെയിലർ ലോഞ്ച് — Asianet News Malayalam 'അറ്റാക്ക് വന്നതാ സാറേ, ഭാര്യയുടെ മൊഴി', തൃശൂരിൽ 41 കാരനെ കൊന്നത് ഭാര്യയും കാമുകനും ചേർന്ന്, തോർത്തുകൊണ്ട് കഴുത്തിൽ വലിച്ച് മുറുക്കി — Asianet News Malayalam കുന്നത്തൂർ മിനി സിവിൽ സ്റ്റേഷൻ നിർമാണത്തിൽ വീഴ്ച; മൂന്ന് പിഡബ്ല്യുഡി എഞ്ചിനീയർമാർക്ക് സസ്പെൻഷൻ, കരാറുകാർ ഊരാളുങ്കൽ സൊസൈറ്റി — Asianet News Malayalam 'നാല് താരങ്ങൾ, നാല് ഇടങ്ങൾ; ഒരേസമയം 'ഉടുമ്പൻചോല വിഷൻ' ട്രെയിലർ ലോഞ്ച് — Asianet News Malayalam
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അദ്ദുഖാൻ الدخان Ad-Dukhan

Surah 44 മക്കിയ്യ • مكية • Makkiyah 59 ആയത്തുകൾ • 59 Ayahs

സൂറത്ത് അദ്ദുഖാൻ (Ad-Dukhan), ഖുർആൻ അധ്യായം 44 — അറബി ആയത്തുകളും हिन्दी വിവർത്തനവും ഉൾപ്പെടെ 59 ആയത്തുകൾ വായിക്കുക. Read Surah Ad-Dukhan with Arabic text and हिन्दी translation.

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1

ह़ा, मीम।

حمٓ ۝١
2

क़सम है स्पष्ट करने वाली पुस्तक की।

وَٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُبِينِ ۝٢
3

निःसंदेह हमने इसे[1] एक बरकत वाली रात में उतारा है। निःसंदेह हम डराने वाले थे।

إِنَّآ أَنزَلۡنَٰهُ فِي لَيۡلَةٖ مُّبَٰرَكَةٍۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ ۝٣
4

इसी (रात) में प्रत्येक अटल मामले का निर्णय किया जाता है।

فِيهَا يُفۡرَقُ كُلُّ أَمۡرٍ حَكِيمٍ ۝٤
5

हमारी ओर से आदेश के कारण। निःसंदेह हम ही भेजने वाले थे।

أَمۡرٗا مِّنۡ عِندِنَآۚ إِنَّا كُنَّا مُرۡسِلِينَ ۝٥
6

आपके पालनहार की दया के कारण। निश्चय वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

رَحۡمَةٗ مِّن رَّبِّكَۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ ۝٦
7

जो आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का पालनहार है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।

رَبِّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَآۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ ۝٧
8

उसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवित करता और मारता है। तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादाओं का पालनहार है।

لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ رَبُّكُمۡ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ ۝٨
9

बल्कि वे संदेह में पड़े खेल रहे हैं।

بَلۡ هُمۡ فِي شَكّٖ يَلۡعَبُونَ ۝٩
10

तो आप उस दिन की प्रतीक्षा करें, जब आकाश प्रत्यक्ष धुआँ[2] लाएगा।

فَٱرۡتَقِبۡ يَوۡمَ تَأۡتِي ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانٖ مُّبِينٖ ۝١٠
11

जो लोगों को ढाँप लेगा। यह दुःखदायी यातना है।

يَغۡشَى ٱلنَّاسَۖ هَٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٞ ۝١١
12

ऐ हमारे पालनहार! हमसे यह यातना दूर कर दे। निःसंदेह हम ईमान लाने वाले हैं।

رَّبَّنَا ٱكۡشِفۡ عَنَّا ٱلۡعَذَابَ إِنَّا مُؤۡمِنُونَ ۝١٢
13

उनके लिए नसीहत कहाँ? हालाँकि, निश्चित रूप से उनके पास स्पष्ट करने वाला रसूल आ चुका।

أَنَّىٰ لَهُمُ ٱلذِّكۡرَىٰ وَقَدۡ جَآءَهُمۡ رَسُولٞ مُّبِينٞ ۝١٣
14

फिर उन्होंने उससे मुँह फेर लिया और उन्होंने कहा : यह तो सिखाया हुआ है, यह पागल है।

ثُمَّ تَوَلَّوۡاْ عَنۡهُ وَقَالُواْ مُعَلَّمٞ مَّجۡنُونٌ ۝١٤
15

निःसंदेह हम इस यातना को थोड़ी देर के लिए दूर करने वाले हैं। (परंतु) निःसंदेह तुम फिर वही कुछ करने वाले हो।

إِنَّا كَاشِفُواْ ٱلۡعَذَابِ قَلِيلًاۚ إِنَّكُمۡ عَآئِدُونَ ۝١٥
16

जिस दिन हम बड़ी पकड़[3] पकड़ेंगे, निःसंदेह हम बदला लेने वाले हैं।

يَوۡمَ نَبۡطِشُ ٱلۡبَطۡشَةَ ٱلۡكُبۡرَىٰٓ إِنَّا مُنتَقِمُونَ ۝١٦
17

तथा निःसंदेह हमने इनसे पूर्व फ़िरऔन की जाति की परीक्षा ली तथा उनके पास एक अति सम्मानित रसूल आया।

۞ وَلَقَدۡ فَتَنَّا قَبۡلَهُمۡ قَوۡمَ فِرۡعَوۡنَ وَجَآءَهُمۡ رَسُولٞ كَرِيمٌ ۝١٧
18

यह कि अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

أَنۡ أَدُّوٓاْ إِلَيَّ عِبَادَ ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٞ ۝١٨
19

तथा यह कि अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, निःसंदेह मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाने वाला हूँ।

وَأَن لَّا تَعۡلُواْ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنِّيٓ ءَاتِيكُم بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ ۝١٩
20

तथा निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की इससे शरण ली है कि तुम मुझपर पथराव कर मेरी जान ले लो।

وَإِنِّي عُذۡتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمۡ أَن تَرۡجُمُونِ ۝٢٠
21

और अगर तुम मेरी बात नहीं मानते, तो मुझसे दूर रहो।

وَإِن لَّمۡ تُؤۡمِنُواْ لِي فَٱعۡتَزِلُونِ ۝٢١
22

अंततः उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह ये अपराधी लोग हैं।

فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنَّ هَٰٓؤُلَآءِ قَوۡمٞ مُّجۡرِمُونَ ۝٢٢
23

अतः तुम मेरे बंदों को लेकर रातों-रात चले जाओ। निःसंदेह तुम्हारा पीछा किया जाएगा।

فَأَسۡرِ بِعِبَادِي لَيۡلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ ۝٢٣
24

तथा सागर को अपनी दशा पर ठहरा हुआ छोड़ दे। निःसंदेह वे एक ऐसी सेना हैं, जो डुबोए जाने वाले हैं।

وَٱتۡرُكِ ٱلۡبَحۡرَ رَهۡوًاۖ إِنَّهُمۡ جُندٞ مُّغۡرَقُونَ ۝٢٤
25

वे कितने ही बाग़ और जल स्रोत छोड़ गए।

كَمۡ تَرَكُواْ مِن جَنَّٰتٖ وَعُيُونٖ ۝٢٥
26

तथा खेतियाँ और बढ़िया स्थान।

وَزُرُوعٖ وَمَقَامٖ كَرِيمٖ ۝٢٦
27

तथा सुख-सामग्री, जिनमें वे आनंद ले रहे थे।

وَنَعۡمَةٖ كَانُواْ فِيهَا فَٰكِهِينَ ۝٢٧
28

ऐसा ही हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी दूसरे[4] लोगों को बना दिया।

كَذَٰلِكَۖ وَأَوۡرَثۡنَٰهَا قَوۡمًا ءَاخَرِينَ ۝٢٨
29

फिर न उनपर आकाश और धरती रोए और न वे मोहलत पाने वाले हुए।

فَمَا بَكَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلسَّمَآءُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَا كَانُواْ مُنظَرِينَ ۝٢٩
30

तथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को अपमानकारी यातना से बचा लिया।

وَلَقَدۡ نَجَّيۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ مِنَ ٱلۡعَذَابِ ٱلۡمُهِينِ ۝٣٠
31

फ़िरऔन से। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों में से एक सरकश व्यक्ति था।

مِن فِرۡعَوۡنَۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَالِيٗا مِّنَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ ۝٣١
32

तथा निःसंदेह हमने उन्हें ज्ञान के आधार पर संसार वासियों पर चुन लिया।

وَلَقَدِ ٱخۡتَرۡنَٰهُمۡ عَلَىٰ عِلۡمٍ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ ۝٣٢
33

तथा हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ प्रदान कीं, जिनमें खुली परीछा थी।

وَءَاتَيۡنَٰهُم مِّنَ ٱلۡأٓيَٰتِ مَا فِيهِ بَلَٰٓؤٞاْ مُّبِينٌ ۝٣٣
34

निःसंदेह ये[5] लोग निश्चय कहते हैं।

إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَيَقُولُونَ ۝٣٤
35

कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।

إِنۡ هِيَ إِلَّا مَوۡتَتُنَا ٱلۡأُولَىٰ وَمَا نَحۡنُ بِمُنشَرِينَ ۝٣٥
36

तो तुम हमारे बाप-दादा को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो?

فَأۡتُواْ بِـَٔابَآئِنَآ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ۝٣٦
37

क्या ये लोग बेहतर हैं, अथवा तुब्बा' की जाति[6] तथा वे लोग जो उनसे पूर्व थे? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह वे अपराधी थे।

أَهُمۡ خَيۡرٌ أَمۡ قَوۡمُ تُبَّعٖ وَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ أَهۡلَكۡنَٰهُمۡۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ مُجۡرِمِينَ ۝٣٧
38

और हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया है।

وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا لَٰعِبِينَ ۝٣٨
39

हमने उन दोनों को सत्य ही के साथ पैदा किया है, किंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।

مَا خَلَقۡنَٰهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ۝٣٩
40

निश्चय फ़ैसले[7] का दिन उन सब का नियत समय है।

إِنَّ يَوۡمَ ٱلۡفَصۡلِ مِيقَٰتُهُمۡ أَجۡمَعِينَ ۝٤٠
41

जिस दिन कोई साथी किसी साथी के कुछ काम न आएगा और न उनकी सहायता की जाएगी।

يَوۡمَ لَا يُغۡنِي مَوۡلًى عَن مَّوۡلٗى شَيۡـٔٗا وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ ۝٤١
42

किंतु जिसपर अल्लाह ने दया की, निःसंदेह वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।

إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ۝٤٢
43

निःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का वृक्ष।

إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ ۝٤٣
44

पापी का भोजन है।

طَعَامُ ٱلۡأَثِيمِ ۝٤٤
45

पिघले हुए ताँबे (या तलछट) की तरह, पेटों में खौलता है।

كَٱلۡمُهۡلِ يَغۡلِي فِي ٱلۡبُطُونِ ۝٤٥
46

गर्म पानी के खौलने की तरह।

كَغَلۡيِ ٱلۡحَمِيمِ ۝٤٦
47

इसे पकड़ो, फिर इसे धधकती आग के बीच तक घसीटकर ले जाओ।

خُذُوهُ فَٱعۡتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلۡجَحِيمِ ۝٤٧
48

फिर खौलते हुए पानी की कुछ यातना उसके सिर पर उँडेल दो।[8]

ثُمَّ صُبُّواْ فَوۡقَ رَأۡسِهِۦ مِنۡ عَذَابِ ٱلۡحَمِيمِ ۝٤٨
49

चख, निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है जो बड़ा बलशाली और सम्माननीय है।

ذُقۡ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡكَرِيمُ ۝٤٩
50

निःसंदे यह वही है जिसके बारे में तुम संदेह करते थे।

إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمۡتَرُونَ ۝٥٠
51

निःसंदेह परहेज़गार लोग शांति एवं सुरक्षा वाली जगह में होंगे।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٖ ۝٥١
52

बाग़ों तथा जल स्रोतों में।

فِي جَنَّٰتٖ وَعُيُونٖ ۝٥٢
53

वे बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहनेंगे, आमने-सामने बैठे होंगे।

يَلۡبَسُونَ مِن سُندُسٖ وَإِسۡتَبۡرَقٖ مُّتَقَٰبِلِينَ ۝٥٣
54

ऐसा ही होगा और हम उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर देंगे, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली होंगी।

كَذَٰلِكَ وَزَوَّجۡنَٰهُم بِحُورٍ عِينٖ ۝٥٤
55

वे उसमें निश्चिंत होकर हर प्रकार के फल मंगवाएँगे।

يَدۡعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ ۝٥٥
56

वे उसमें मृत्यु[9] का स्वाद नहीं चखेंगे, परंतु वह मृत्यु जो पहली थी, और वह (अल्लाह) उन्हें दहकती हुई आग के अज़ाब से बचा लेगा।

لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلۡمَوۡتَ إِلَّا ٱلۡمَوۡتَةَ ٱلۡأُولَىٰۖ وَوَقَىٰهُمۡ عَذَابَ ٱلۡجَحِيمِ ۝٥٦
57

आपके पालनहार की ओर से अनुग्रह के कारण। यही बहुत बड़ी सफलता है।

فَضۡلٗا مِّن رَّبِّكَۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ۝٥٧
58

सो तथ्य यही है कि हमने इसे आपकी भाषा में आसान कर दिया है, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।

فَإِنَّمَا يَسَّرۡنَٰهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ ۝٥٨
59

अतः आप प्रतीक्षा करें,[10] निःसंदेह वे भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।

فَٱرۡتَقِبۡ إِنَّهُم مُّرۡتَقِبُونَ ۝٥٩